- हो गई है पीर
पर्वत सी पिघलनी चाहिए अब हिमालय से कोई गंगा निकलनी
चाहिए
इस नुमाइश में
मिला वह चीथड़े पहने हुएमैंने पूछा कौन, तो बोला कि
हिंदुस्तान हूँ.
यहाँ तक
आते-आते सूख जाती है कई नदियाँहमें मालूम है पानी कहाँ
ठहरा हुआ होगा
कहाँ
तो तय था चिराग़ाँ हरेक घर के लिएकहाँ चिराग़ मयस्सर नहीं
शहर के लिए
